एक मस्जिद में पैसे देने की नजर मानकर दूसरी मस्जिद में देना

यदि किसी व्यक्ति ने यह नजर मानी के यदि मेरा काम हो गया तो मैं फुलां मस्जिद में पैसे दूंगा काम पूरा होने के बाद वह पैसे जिस मस्जिद के लिए कहा था उसमें ना दे करके दूसरी मस्जिद में देता है या किसी गरीब को भी दे देता है तब भी उसकी नजर पूरी हो जाएगी. (वल्लाहु आलम) मुस्तफाद: फतावा कासमिया फतावा शामी पार्ट नंबर3 पेज नंबर 424 हिदायतुल्लाह खादिम मदरसा रशीदिया ड़ंगरा गया बिहार HIDAYATULLAH TEACHER.MADARSA RASHIDIA.DANGRA.GAYA.BIHAR.INDIA नोट. अधिक जानकारी हेतु संपर्क भी कर सकते हैं। CONTAT.NO +916206649711 ????????????????????????????????????????????????

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